कुशाग्र ने अपनी नई-नवेली पत्नी मीनाक्षी को खुश करने के लिए हर मुमकिन कोशिश की थी। उनकी अरेंज मैरिज हुई थी और शादी से पहले दोनों कभी मिले भी नहीं थे। लेकिन कुशाग्र ने इस कमी को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।
वह अपनी पत्नी के प्यार में पूरी तरह डूब चुका था।
हर सुबह वह जल्दी उठता, उसके लिए चाय बनाता, नाश्ता तैयार करता और उसकी जरूरत की हर चीज का ध्यान रखता। कभी फूल लाता, कभी छोटे-छोटे सरप्राइज देता और कभी बिना किसी वजह के उसकी तारीफ करने लगता।
“मीनू, तुम्हारी चाय।”
“जी।”
“मेरा दुपट्टा ला दो।”
“अभी लाया।”
“मेरे पीछे-पीछे घूमना बंद करो। जाकर कुछ काम करो।”
“जी, मीनू।”
वह खुशी-खुशी उसकी हर बात मान लेता। और लगभग हर दिन एक ही बात कहना नहीं भूलता।
“आई लव यू, मीनू।”
लेकिन मीनाक्षी हमेशा की तरह शांत और सख्त रहती। वह उसके प्यार और परवाह को स्वीकार तो करती, लेकिन कभी खुलकर अपने दिल की बात नहीं कहती। ऐसा लगता था जैसे कुशाग्र का प्यार जताना उसकी रोजमर्रा की जिंदगी का एक आम हिस्सा बन गया हो।
एक दिन उसकी सबसे अच्छी दोस्त रिया घर आई। कुशाग्र दोनों के लिए नाश्ता लेकर आया। वह हमेशा की तरह बेहद हैंडसम लग रहा था।
रिया उसे देखकर बोली, “मीनू! तुम्हारा पति तो बिल्कुल फिल्मी हीरो जैसा हैंडसम है! और देखो उसकी बॉडी! एकदम शेर जैसा मजबूत!”
मीनाक्षी गर्व से मुस्कुराई।
“शेर? ये शेर मेरे सामने बिल्ली बन जाता है।”
पीछे खड़े कुशाग्र ने हंसते हुए कहा, “बिल्कुल सही कह रही हैं। मैं तो इनकी बिल्ली हूं।”
रिया जोर से हंस पड़ी।
मीनाक्षी को अपने पति की ऐसी तारीफ करना और सबके सामने उसका आज्ञाकारी स्वभाव दिखाना अच्छा लगता था। कुशाग्र भी खुशी-खुशी उसका साथ देता था। आखिर अपनी पत्नी को मुस्कुराते देखना ही उसकी सबसे बड़ी खुशी थी।
लेकिन कभी-कभी, जब मीनाक्षी उसे नहीं देख रही होती, तो उसकी मुस्कान गायब हो जाती। वह सोचता कि क्या उसकी पत्नी उसे सच में अपना जीवनसाथी मानती भी है या सिर्फ एक ऐसे इंसान की तरह देखती है जो उसकी हर जरूरत पूरी करता है।
फिर भी उसने कोशिशें जारी रखीं।
उनकी शादी का एक महीना पूरा होने पर उसने खास डिनर का इंतजाम किया। पूरे डाइनिंग एरिया को लाइटों और गुलाबों से सजाया और मीनाक्षी की पसंद के सारे पकवान खुद बनाए।
मीनाक्षी नीचे आई तो सजावट देखकर हैरान रह गई।
“ये सब क्या है?”
“हैप्पी वन मंथ, मीनू!” उसने उसे फूलों का गुलदस्ता देते हुए कहा। “तुम्हारे साथ एक महीना पूरा हो गया। पता है, ये कोई बहुत बड़ी बात नहीं है, लेकिन मैं इसे खास बनाना चाहता था।”
“थैंक यू।”
वह कुछ और सुनने की उम्मीद कर रहा था, लेकिन मीनाक्षी चुपचाप बैठ गई।
खाने के दौरान भी वह प्यार से उसे खाना परोसता रहा। उसकी प्लेट से मिर्च तक हटा दी, क्योंकि उसे पता था कि मीनाक्षी ज्यादा तीखा नहीं खाती।
“खाना अच्छा बना है,” मीनाक्षी ने कहा।
उसका चेहरा खिल उठा।
“सच में? फिर तो मैं दोबारा बनाऊंगा!”
“ज्यादा खुश मत हो। कोई प्रोफेशनल शेफ नहीं बन गए हो।”
वह हंस तो दिया, लेकिन उसके मन में थोड़ी निराशा रह गई।
उस रात वह खुद को रोक नहीं पाया।
“मीनू, क्या तुम मुझे पसंद करती हो?”
मीनाक्षी ने हैरानी से देखा।
“ये कैसा सवाल है?”
“सवाल तो सीधा है। क्या तुम सच में मुझे पसंद करती हो या सिर्फ इसलिए साथ हो क्योंकि मैं तुम्हारा पति हूं?”
उसने थकान भरे अंदाज में कहा, “कुशाग्र, मैं थकी हुई हूं। अभी ये सब बातें नहीं कर सकते?”
उसने सिर हिला दिया।
“जी।”
लेकिन उसके दिल का बोझ बढ़ता जा रहा था।
कुछ दिन बाद आखिरकार उसने मीनाक्षी से बात करने का फैसला कर लिया।
“मीनू, क्या मुझसे कोई गलती हुई है? क्या मैं तुम्हें परेशान करता हूं? क्या मैं जरूरत से ज्यादा तुम्हारे पीछे पड़ा रहता हूं?”
मीनाक्षी ने हैरानी से पूछा, “कुशाग्र, तुम्हें हुआ क्या है?”
“तो फिर तुम मेरे साथ ऐसा व्यवहार क्यों करती हो जैसे मैं तुम्हारा कोई नौकर हूं? मैं इतनी कोशिश करता हूं, मीनू! तुम्हारी पसंद-नापसंद याद रखता हूं। घर लौटते समय सिर्फ तुम्हारे बारे में सोचता हूं। सुबह उठते ही यही सोचता हूं कि तुम्हें कैसे खुश रखूं। लेकिन तुम्हें कभी मेरे साथ खुश देखकर महसूस ही नहीं होता।”
मीनाक्षी चुप रही।
उसकी आवाज भर्रा गई।
“आखिर मुझमें क्या कमी है? क्या मैं तुम्हारे लायक नहीं हूं? क्या मुझे फूल लाना बंद कर देना चाहिए? तुमसे आई लव यू कहना बंद कर दूं? तुम्हारे पीछे-पीछे घूमना छोड़ दूं?”
“कुशाग्र…”
“बस एक बार बता दो कि मुझे क्या बदलना चाहिए। मैं बदल जाऊंगा।”
उसकी आंखों में आंसू आ गए थे।
“मुझे पता है हमारी अरेंज मैरिज हुई है। मुझे पता है कि तुमने मुझसे प्यार करके शादी नहीं की थी। लेकिन मुझे लगा था कि शायद एक दिन तुम मुझसे प्यार करने लगोगी। मैं ये उम्मीद नहीं करता कि तुम रातोंरात मुझसे प्यार करने लगो। बस इतना चाहता हूं कि तुम्हें मेरा साथ अच्छा लगे।”
उसने मुश्किल से अपने आंसू रोके।
“जब तुम सबके सामने मुझे अपना ट्रेन किया हुआ शेर कहती हो, तो मैं भी हंस देता हूं। लेकिन मीनू, कभी-कभी मेरा भी मन करता है कि तुम मुझे सिर्फ अपना आज्ञाकारी पति नहीं, बल्कि अपना जीवनसाथी समझो।”
वह अपने आंसू पोंछते हुए जाने लगा।
“सॉरी। मुझे ये सब नहीं कहना चाहिए था।”
“कुशाग्र!”
वह पलटा तो देखा कि मीनाक्षी की आंखों से आंसू बह रहे थे।
“मुझे माफ कर दो,” उसने रोते हुए कहा।
वह तुरंत उसके पास आया।
“मीनू? क्या हुआ? तुम रो क्यों रही हो?”
“क्योंकि मैं बहुत बुरी हूं। तुम मेरे लिए इतना कुछ करते हो और बदले में मैं तुम्हें कुछ भी नहीं देती।”
उसने प्यार से उसके आंसू पोंछे, लेकिन मीनाक्षी बोलती रही।
“मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं तुम्हारे जैसे इंसान को पाने के लायक हूं, कुशाग्र। जब मैंने पहली बार तुम्हारी फोटो देखी थी, तुम इतने हैंडसम, कॉन्फिडेंट और कामयाब लग रहे थे। मुझे समझ ही नहीं आता था कि तुम मेरे जैसी लड़की को क्यों पसंद करोगे।”
कुशाग्र उसे देखता रह गया।
“शादी वाले दिन जब तुमने पहली बार मुझे देखा था, मैं बहुत डर गई थी। तुम मुझे ऐसे देख रहे थे जैसे मैं दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की हूं। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि तुम मुझे इतना पसंद कैसे कर सकते हो। और जब तुमने मेरा इतना ख्याल रखना शुरू किया, तो मेरा डर और बढ़ गया।”
“किस बात का डर, मीनू?”
“तुमसे जुड़ जाने का। अगर मैं तुमसे बहुत प्यार करने लगी और एक दिन तुम्हारा प्यार कम हो गया तो? अगर मैं तुम पर निर्भर हो गई और तुम्हें लगने लगा कि तुम मुझसे बेहतर किसी को डिजर्व करते हो तो?”
उसने नजरें झुका लीं।
“इसीलिए मैंने तुमसे दूरी बनाए रखी। मैं सख्त बनी रही। मुझे लगा कि अगर मैंने तुम्हें कभी ये नहीं दिखाया कि मैं तुमसे कितना प्यार करने लगी हूं, तो मेरा दिल कभी नहीं टूटेगा।”
कुशाग्र के चेहरे पर नरमी आ गई।
“जब रिया ने तुम्हें शेर कहा था, तो मैंने तुम्हें बिल्ली इसलिए कहा क्योंकि मुझे तुम्हारा वो रूप बहुत पसंद है। मुझे अच्छा लगता है कि पूरी दुनिया तुम्हें एक मजबूत इंसान के रूप में देखती है, लेकिन मेरे सामने तुम इतने नरम और प्यार करने वाले बन जाते हो।”
वह उसके करीब आई।
“लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा कि अपने दिल को बचाने की कोशिश में मैं तुम्हारा दिल दुखा रही थी। मुझे माफ कर दो, कुशाग्र।”
कुशाग्र ने अपनी बाहें फैला दीं और मीनाक्षी तुरंत उसके गले लग गई।
“मैं बस डर गया था, मीनू,” उसने उसे कसकर पकड़ते हुए कहा। “मुझे लगने लगा था कि मेरी पत्नी मुझसे कभी प्यार नहीं करेगी।”
“ऐसा मत कहो।”
“तो फिर क्या कहूं?”
उसने उसके गालों पर हाथ रखा और उसकी आंखों में देखते हुए कहा।
“मैं भी तुमसे प्यार करती हूं, कुशाग्र।”
वह एकदम ठहर गया।
“क्या?”
“मैं तुमसे प्यार करती हूं।”
“एक बार फिर बोलोगी?”
वह आंसुओं के बीच हंस पड़ी।
“आई लव यू, बेवकूफ!”
उसने उसे कसकर गले लगा लिया और माथे पर चूम लिया।
“पता है, मैं कितने दिनों से ये सुनने का इंतजार कर रहा था?”
मीनाक्षी मुस्कुराई और फिर गंभीर होकर बोली।
“तुम्हें हर दिन मेरा प्यार पाने के लिए कुछ साबित करने की जरूरत नहीं है। तुम मेरे पति हो। मेरी जिंदगी में तुम्हारी जगह पहले से है। और हां, मेरे नौकर की तरह रहना बंद करो। मुझे एक जीवनसाथी चाहिए, ऐसा इंसान नहीं जो हर वक्त मेरे आदेश का इंतजार करे।”
उसने सिर हिलाया।
“ठीक है।”
“और मेरी हर बात मानना भी जरूरी नहीं है।”
वह सचमुच हैरान हो गया।
“मीनू, तुम मुझे तुम्हारी बात न मानने के लिए कह रही हो?”
मीनाक्षी जोर से हंस पड़ी।
कुछ हफ्ते बाद रिया फिर उनके घर आई। उसने देखा कि कुशाग्र सोफे पर बैठा मीनाक्षी के पैरों की मालिश कर रहा था और मीनाक्षी आराम से बैठी थी।
रिया मुस्कुराई।
“अरे वाह! हमारा शेर अभी भी बिल्ली बना हुआ है!”
मीनाक्षी गर्व से बोली, “बिल्कुल!”
कुशाग्र ने ऊपर देखा।
“सुनिए, मैं बहुत खतरनाक शेर हूं।”
“अच्छा? तो साबित करके दिखाओ!” रिया ने चुनौती दी।
वह तुरंत मीनाक्षी की तरफ मुड़ा।
“मीनू, दहाड़ूं क्या?”
वह हंसते हुए बोली, “हां, दहाड़ दो।”
उसने पूरी ताकत से शेर की तरह दहाड़ लगाई। दोनों लड़कियां हंसने लगीं।
तभी मीनाक्षी ने आराम से कहा, “कुशाग्र, पानी लाना।”
वह जानबूझकर बैठा रहा।
“खुद ले लो, मैडम।”
मीनाक्षी ने आंखें तरेरीं।
“क्या कहा तुमने?”
वह मुस्कुराया।
“एक किस, फिर पानी लेकर आता हूं।”
“बेशर्म!”
“आपका बेशर्म पति।”
रिया ने सिर हिलाते हुए कहा, “कमाल है! ऐसा शेर जो किस के लिए भी मोलभाव करता है।”
मीनाक्षी उसके करीब आई और धीरे से उसके कान में कुछ कहा।
कुशाग्र तुरंत उठ खड़ा हुआ।
“पानी! अभी लाया!”
रिया जोर-जोर से हंसने लगी।
मीनाक्षी मुस्कुराते हुए अपने हैंडसम पति को किचन में जाते देखती रही।
कुछ शेरों को काबू में करने की जरूरत नहीं होती। उन्हें बस इतना एहसास दिलाना होता है कि उनसे प्यार किया जाता है।

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