बिंदु ने अपने पति के बारे में सबसे पहली बात यह महसूस की कि वह कुछ ज़्यादा ही सज्जन थे। और दूसरी बात यह कि यह उसके लिए एक बड़ी समस्या होने वाली थी।
लक्ष्य ने कार का दरवाज़ा खोला, उसे आराम से बैठाया और एसी का रुख उसकी तरफ से थोड़ा हटा दिया।
“आराम से बैठी हो?”
“जी।”
“थक गई हो?”
“थोड़ी सी।”
“घर पहुँचकर आराम कर लेना।”
बिंदु ने सिर हिला दिया।
उनकी शादी को मुश्किल से कुछ घंटे हुए थे। शादी से पहले उनकी केवल दो मुलाकातें हुई थीं, वो भी परिवार वालों की मौजूदगी में। दोनों को एक-दूसरे को जानने का मौका ही नहीं मिला था।
बिंदु खिड़की से बाहर देखने लगी।
कितने तहज़ीबदार हैं! पक्का सुबह उठकर अखबार पढ़ते होंगे और फिर चाय पीते होंगे।
लक्ष्य भी मन ही मन खुश था कि उसने शुरुआत अच्छी की है। माँ और बहन ने उसे समझाया था कि पत्नी को आराम और अपनापन महसूस कराना उसकी ज़िम्मेदारी है। वह एक अच्छा पति बनना चाहता था।
उसे क्या पता था कि उसकी पत्नी भी एक अच्छी पत्नी बनने की पूरी कोशिश कर रही है।
घर पहुँचते ही परिवार ने बिंदु का जोरदार स्वागत किया। रस्में, तस्वीरें, हँसी-मज़ाक और ढेर सारे निर्देश। बिंदु सबके नाम और रिश्ते याद करने की कोशिश करती रही।
जब एक रिश्तेदार उसे तस्वीरें खिंचवाने के लिए ले जाने लगा, तो लक्ष्य ने बीच में रोक दिया।
“बस भी करो। इतने समय से हील पहनकर खड़ी है। थोड़ा आराम करने दो।”
बिंदु ने उसकी तरफ देखकर मुस्कुरा दिया।
कितना ध्यान रखते हैं!
कुछ देर बाद लक्ष्य उसे कमरे में ले गया। कमरा खूबसूरती से सजा था। बिस्तर पर सफेद चादर, मेज़ पर चॉकलेट और पानी, और एक फूलदान में ताज़े फूल रखे थे।
“कैसा लगा?” लक्ष्य ने पूछा।
“बहुत सुंदर है।”
“अच्छा। अलमारी का एक हिस्सा तुम्हारे लिए खाली कर दिया है। कुछ चाहिए हो तो बता देना।”
“जी, शुक्रिया।”
“तुम थक गई होगी। आराम से कपड़े बदल लो। मैं नीचे हूँ।”
लक्ष्य के जाते ही बिंदु ने लंबी साँस ली।
हे भगवान! कितना अच्छा पति मिला है। अब मुझे भी इनकी पसंद का ध्यान रखना होगा।
नीचे लक्ष्य की बहन नैना उसे छेड़ रही थी।
“भाई, शादी के बाद इतने बदल गए हो?”
“क्या मतलब?”
“सुबह से बस भाभी-भाभी कर रहे हो।”
उसका बड़ा भाई अर्जुन भी हँस पड़ा।
“इसे छोड़ दे। अपनी अच्छी लड़के वाली इमेज बनाने में लगा है।”
लक्ष्य ने उसे घूरा और वहाँ से चला गया।
उस रात दोनों बहुत देर तक सो नहीं पाए। दोनों अपने-अपने हिस्से में चुपचाप लेटे रहे।
“लक्ष्य?”
“हाँ?”
“आप जाग रहे हैं?”
“जी।”
“कुछ नहीं। गुड नाइट।”
“गुड नाइट।”
और दोनों फिर चुप हो गए।
अगली सुबह लक्ष्य छह बजे उठ गया। उसने नहाकर चाय बनाई और बिंदु के लिए कमरे में ले आया।
“गुड मॉर्निंग! तुम्हारे लिए चाय।”
बिंदु हैरान रह गई।
“आपने बनाई है?”
“हाँ।”
“शुक्रिया।”
उसने चाय की चुस्की ली।
चाय भी बनाते हैं!
लक्ष्य ने पूछा, “तुम रोज़ जल्दी उठती हो?”
बिंदु का गला अटकते-अटकते बचा।
“जी… कभी-कभी।”
“अच्छा।”
लक्ष्य चला गया और बिंदु ने मन ही मन तय कर लिया कि वह भी सुबह जल्दी उठने की आदत डालेगी।
अगले कुछ दिनों तक दोनों एक-दूसरे को प्रभावित करने की कोशिश करते रहे।
लक्ष्य सुबह जल्दी उठता, कपड़े तह करके रखता और कमरे को साफ रखता। बिंदु भी जल्दी उठती, रसोई में मदद करती और फूलदान में रोज़ नए फूल सजाती।
असल में लक्ष्य को फूलों से कोई खास लगाव नहीं था और बिंदु को सुबह जल्दी उठने से सख्त नफरत थी।
लेकिन दोनों को लगता था कि सामने वाले को यही सब पसंद है।
एक दिन बिंदु ने लक्ष्य के लिए चिली पोटैटो बनाने का फैसला किया। उसने सुना था कि लक्ष्य को यह बहुत पसंद है।
एक घंटे की मेहनत के बाद रसोई की हालत खराब हो चुकी थी।
लक्ष्य अंदर आया।
“क्या बना रही हो?”
“कुछ नहीं!”
उसने बर्तन में देखा।
“अरे, चिली पोटैटो!”
बिंदु मुस्कुराई।
“पसंद हैं न?”
“बहुत!”
उसने एक टुकड़ा खाया। अगले ही पल उसकी आँखों में पानी आ गया। बिंदु ने मिर्च कुछ ज़्यादा ही डाल दी थी।
“कैसे बने हैं?” उसने उत्सुकता से पूछा।
“बहुत अच्छे!”
लक्ष्य ने मन ही मन सोचा, इतने प्यार से बनाया है। अब इसे कैसे बताऊँ कि मेरी जीभ सुन्न हो गई है!
उसने पूरी प्लेट खत्म कर दी।
बिंदु अपनी तारीफ सुनकर खुश थी और लक्ष्य पानी पीकर अपनी हालत संभाल रहा था।
शादी की आठवीं रात थी। रात के करीब दो बजे लक्ष्य सोने की कोशिश कर रहा था, जबकि बिंदु फोन पर वीडियो देखकर हँस रही थी।
“क्या हुआ?” लक्ष्य ने पूछा।
“कुछ नहीं।”
वह भी वीडियो देखने लगा और खुद हँस पड़ा।
कुछ देर बाद बिंदु को भूख लगने लगी।
“लक्ष्य?”
“हम्म?”
“भूख लगी है?”
“थोड़ी सी।”
“मैगी है?”
लक्ष्य ने उसकी तरफ देखा।
“हाँ, ऊपर अलमारी में।”
बिंदु तुरंत उठ गई।
“चलो बनाते हैं!”
दोनों रसोई में पहुँचे। बिंदु ने अलमारी खोली तो मैगी के तीन पैकेट मिले।
“तीन पैकेट?”
लक्ष्य ने कंधे उचका दिए।
“कभी-कभी भूख लग जाती है।”
“रात में?”
“हाँ।”
बिंदु ने उसे शक से देखा।
“आप कितनी देर से सोते हैं?”
“आमतौर पर सुबह पाँच-छह बजे।”
बिंदु एकदम रुक गई।
“क्या?”
“क्या हुआ?”
“आप सुबह छह बजे सोते हैं?”
“कभी-कभी।”
“सुबह वाले छह बजे?”
लक्ष्य ने हैरानी से सिर हिलाया।
“हाँ।”
बिंदु ज़ोर से हँस पड़ी।
“मैं भी सुबह छह बजे सोती हूँ!”
लक्ष्य ने हाथ का बर्तन नीचे रख दिया।
“क्या?”
“हाँ! मैं भी रात भर जागती हूँ!”
दोनों एक-दूसरे को देखते रहे।
फिर लक्ष्य हँसने लगा।
“तो तुम सुबह सात बजे क्यों उठती थीं?”
बिंदु ने तुरंत जवाब दिया।
“और आप सुबह छह बजे क्यों उठते थे?”
कुछ पल दोनों चुप रहे। फिर एक साथ हँस पड़े।
“आप मेरे लिए सुबह जल्दी उठते थे?” बिंदु ने पूछा।
“और तुम मेरे लिए?”
“मुझे लगा आपको सुबह जल्दी उठना पसंद है!”
“मुझे लगा तुम्हें!”
बिंदु ने अपना सिर पकड़ लिया।
“हे भगवान! हम दोनों कितने बड़े बेवकूफ हैं!”
लक्ष्य हँसते हुए बोला, “एक बात बताओ, तुम्हें सच में फूल पसंद हैं?”
“नहीं! मतलब बुरे नहीं लगते, लेकिन रोज़ बदलने का शौक भी नहीं है।”
“तो रोज़ फूलदान क्यों सजाती थीं?”
“क्योंकि मुझे लगा आपको पसंद हैं!”
लक्ष्य फिर हँस पड़ा।
“और तुम्हें चाय पसंद है?” बिंदु ने पूछा।
“हाँ, लेकिन सुबह छह बजे नहीं!”
दोनों की हँसी रुकने का नाम नहीं ले रही थी।
“मतलब हम दोनों इतने दिनों से एक-दूसरे के सामने नाटक कर रहे थे?”
“बिल्कुल!”
“आप तो पूरे धोखेबाज़ निकले!”
“और तुम भी कम नहीं हो!”
इसी बीच मैगी उबलकर बर्तन से बाहर गिरने लगी, लेकिन दोनों का ध्यान उस तरफ बिल्कुल नहीं था।
उस रात पहली बार उन्होंने एक-दूसरे के सामने वैसा व्यवहार किया, जैसे वे असल में थे।
न कोई दिखावा, न कोई औपचारिकता।
बस दो लोग, जो रात के दो बजे रसोई में खड़े होकर मैगी के लिए लड़ रहे थे।
लक्ष्य को पहली बार महसूस हुआ कि उसकी पत्नी बहुत मज़ेदार है।
और बिंदु को समझ आ गया कि उसका पति कोई सुबह छह बजे उठने वाला सज्जन इंसान नहीं, बल्कि रात में भूख लगने पर मैगी बनाने वाला पूरा नमूना है।
और शायद, उसे यही नमूना पसंद आने लगा था।
बिंदु का लक्ष्य

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